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Biwi ki taarif

आज तुम्हे क्या कहु प्रिये, संग चलोगी मेरे तुम ।
पार्टी में हमें जाना है, करना ना तुम मुझको तंग ।।
शुरू हुआ कपड़ो का दौर, हो गया फिर मई भाव विभोर ।
ले लो अब तुम साडी सूट, ना करना तुम ज्यादा लूट ।।

जैसे तैसे कपडे आये, मैडम मुझको नाच नचाये ।
होना है अब मुझे तैयार, काम न कहना मुझको यार ।।
तैयार होकर ऐसे लगती, तारीफ़ में उसके क्या बोलू ।
पिट जाऊंगा बुरी तरह से, थोड़ा सा जो मुँह खोलू ।।

फिर भी बोल दिया मैंने तो, तुम ऐश्वर्या लगती हो ।
झूठ हजम नहीं होता तो, फिर क्यों बड़बड़ करती हो ।।
बाल तुम्हारे रेशम जैसे, मैं काँटों का झुण्ड प्रिये ।
तुम हिरणी सी लगती हो, और मैं हाथी का सूंड प्रिये ।।

नयन का काजल ऐसा लगता, क़यामत मुझपे ढाती हो ।
थोड़ा सा सच बोलूंगा तो, आँखें बड़ी दिखती हो ।।
सच तो बोलो कैसे लगती, झूट तो तुमने दिया है बोल ।
टमाटर जैसे गाल लाल है, होठो को करदो थोड़ा गोल ।।

माथे की बिंदिया खूब सजी है, मधु बरसाए तुम्हारे बोल ।
मैं तो बिन प्यादे का लोटा, सुर भी लगता फट गया ढोल ।।
तुम बसंत के फूल के जैसी, सूखी डाल मैं पतझड़ का ।
तुम सावन की बूंदे लगती, काल प्रिये मैं गर्मी का ।।

तुम फूलों की सजती डाली, काँटों भरा मेरा जीवन ।
आंच न आये तुमको कोई, न्योछावर पूरा तन मन ।।
तुम लगती अंगूरी पेठा, रसमलाई की सजी प्लेट ।
मैं खाली डिब्बा हूँ प्रिये, समोसे जैसा मेरा पेट ।।

महक तुम्हारी इतर से प्यारी, श्रृंगार तुम्हारा मधुवन है ।
मैं राहों का कांटा कंकड़, तभी हमारी अनबन है ।।
बहक न जाओ बातों से फिर, ज्यादा करू जो मैं तारीफ़ ।
समय मिला तो फिर बोलूंगा, तब तक है खुदा हाफिज ।।

Submitted By: Shiv Charan on 12 -Nov-2017 | View: 33

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